ब्रेकिंग
होर्मुज़ बंद, ईरान पर अमेरिका के नए हमले: ट्रंप की धमकी— बिजलीघर और पुल भी निशाने परआगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बस पलटी, कार से टक्कर: उन्नाव में 5 की मौत, 8 घायलबिजली गिरने से 3 की मौत: यूपी में मानसून सक्रिय, गरज-चमक का अलर्ट — बरतें सावधानीक़तर के रास लफ़ान में धमाका: 12 भारतीयों की मौत, जयशंकर बोले- दूतावास मदद में जुटालखनऊ अग्निकांड: एनिमेशन सेंटर में आग से 15 की मौत, 4 गिरफ्तार, SIT जांचफिरोजाबाद: मोहन भागवत जिस ट्रेन में सवार थे, उस पर पथराव; संघ प्रमुख सुरक्षितहोर्मुज़ बंद, ईरान पर अमेरिका के नए हमले: ट्रंप की धमकी— बिजलीघर और पुल भी निशाने परआगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बस पलटी, कार से टक्कर: उन्नाव में 5 की मौत, 8 घायलबिजली गिरने से 3 की मौत: यूपी में मानसून सक्रिय, गरज-चमक का अलर्ट — बरतें सावधानीक़तर के रास लफ़ान में धमाका: 12 भारतीयों की मौत, जयशंकर बोले- दूतावास मदद में जुटालखनऊ अग्निकांड: एनिमेशन सेंटर में आग से 15 की मौत, 4 गिरफ्तार, SIT जांचफिरोजाबाद: मोहन भागवत जिस ट्रेन में सवार थे, उस पर पथराव; संघ प्रमुख सुरक्षित
राजनीति

राजभर का दावा- सपा में बड़ी टूट तय, अखिलेश खेमे में बेचैनी का इशारा

ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में अंदरूनी टूट का दावा दोहराया और अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल का इशारा किया। जानिए पूरा बयान और संदर्भ।

राजभर का दावा- सपा में बड़ी टूट तय, अखिलेश खेमे में बेचैनी का इशारा
लखनऊ:

लखनऊ की सियासी हवा में इन दिनों एक ही जुमला तैर रहा है — टूट। और इसे हवा देने वाला नाम है ओम प्रकाश राजभर का।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और प्रदेश सरकार में मंत्री राजभर ने एक बार फिर दावा किया है कि समाजवादी पार्टी में बड़ी अंदरूनी टूट तय है। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व को लेकर असंतोष का इशारा भी किया।

यह राजभर का बयान है। सपा की ओर से इस दावे की कोई पुष्टि नहीं हुई है, और न ही पार्टी ने टूट की किसी आहट को स्वीकार किया है। राजनीति में प्रतिद्वंद्वी खेमे की ओर से इस तरह के दावे नए नहीं — इसलिए इसे फ़िलहाल एक राजनीतिक बयान की तरह ही पढ़ा जाना चाहिए, न कि घटित तथ्य की तरह।

संदर्भ यह है कि उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के भीतर "सब ठीक नहीं" का संदेश देने की कोशिश एक जानी-पहचानी सियासी चाल है। दावे का असली मोल तभी है जब उसके पीछे कोई नाम, कोई इस्तीफ़ा, कोई पाला-बदल खड़ा हो।

फ़िलहाल वैसा कुछ सामने नहीं है। बयान है, दावा है — और दूसरी तरफ़ की चुप्पी है।

आने वाले दिनों में देखना यही होगा कि यह सिर्फ़ शब्दों की गरमी है या इसके पीछे ज़मीन पर कोई हलचल भी है। तब तक, हर दावे को उसी तराज़ू पर तौलिए जिस पर सबूत रखे जाते हैं।

शेयर करें:WhatsAppXFacebook

टिप्पणियाँ

सबसे पहले अपनी राय दें।