होर्मुज़ बंद, ईरान पर अमेरिका के नए हमले: ट्रंप की धमकी— बिजलीघर और पुल भी निशाने पर
अमेरिका ने ईरान पर लगातार चौथी रात हमले किए और बंदरगाहों की नाकेबंदी फिर शुरू कर दी। होर्मुज़ जलसंधि बंद; ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन दागे।

समझिए, खाड़ी में अब लड़ाई सिर्फ़ ज़मीन की नहीं — पानी की है। और वह पानी दुनिया का सबसे क़ीमती रास्ता है।
अमेरिका ने बुधवार सुबह ईरान पर हमलों की नई लहर शुरू की, जिनका निशाना — अमेरिकी पक्ष के मुताबिक — ईरान की जहाज़ों पर हमला करने की क्षमता थी। यह लगातार चौथी रात के हमलों के बाद हुआ। मंगलवार को अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी दोबारा शुरू कर दी।
**ईरान का पलटवार।** ईरान का कहना है कि हमलों में 30 से ज़्यादा नागरिक मारे गए हैं। दक्षिण-पूर्वी ईरान में एक बैरक पर हमले में सात सैनिकों की मौत के बाद ईरानी सेना ने जवाब देने का ऐलान किया। इसके बाद कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया — कुवैत ने छह मिसाइलें और 33 ड्रोन गिराने का दावा किया, जॉर्डन ने तीन मिसाइलें, और बहरीन में सायरन बजते रहे।
**सबसे बड़ी चोट यहाँ।** होर्मुज़ जलसंधि बंद है। बीते चौबीस घंटे में चेतावनी-फ़ायर के बाद दो जहाज़ रोके गए। पिछले एक हफ़्ते में ईरान ने सात व्यापारिक जहाज़ों पर हमला किया, जिनमें क़रीब एक दर्जन नाविक मारे गए, लापता हैं या घायल हुए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर तेहरान बातचीत की मेज़ पर नहीं लौटा, तो हमले बिजलीघरों और पुलों तक बढ़ाए जाएँगे।
**भारत इससे क्यों जुड़ा है।** दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल इसी पतली पट्टी से गुज़रता है — और भारत उसका बड़ा ख़रीदार। रास्ता बंद, बीमा महँगा, माल-भाड़ा ऊपर — यह ज़ंजीर सीधे आपके पेट्रोल पंप और रसोई तक पहुँचती है। खाड़ी में काम करते लाखों भारतीय परिवारों की चिंता अलग।
नक़्शे पर होर्मुज़ एक लकीर भर है। हक़ीक़त में वह दुनिया की सबसे संकरी गर्दन है — और इस वक़्त उस पर हाथ है।
(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)
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