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राजनीति

बंगाल LoP विवाद: हाई कोर्ट से ममता को राहत नहीं, रीताब्रत बरकरार

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष पद के विवाद में अंतरिम राहत देने से इनकार किया। रीताब्रत बनर्जी फ़िलहाल इस पद पर बने रहेंगे।

बंगाल LoP विवाद: हाई कोर्ट से ममता को राहत नहीं, रीताब्रत बरकरार
कोलकाता:

अदालत की एक 'नहीं' कभी-कभी पूरी सियासत की दिशा बता देती है। बंगाल में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के विवाद में आज वही 'नहीं' सुनाई दी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने रीताब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के ख़िलाफ़ दायर चुनौती में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी फ़िलहाल विधानसभा अध्यक्ष का वह फ़ैसला बरकरार है, और रीताब्रत बनर्जी इस पद पर बने रहेंगे।

अदालत ने मामले को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों को हलफ़नामों के आदान-प्रदान का निर्देश दिया है। प्रतिवादियों को जवाबी हलफ़नामा दाख़िल करने के लिए तीन हफ़्ते, और याचिकाकर्ता को उसके जवाब के लिए दो हफ़्ते का अतिरिक्त समय दिया गया है। अगली सुनवाई इसके बाद होगी।

यह तकनीकी सी दिखने वाली बात असल में बड़ी है। नेता प्रतिपक्ष कोई औपचारिक कुर्सी भर नहीं — यही वह पद है जो तमाम अहम समितियों और नियुक्तियों में विपक्ष की आवाज़ तय करता है। इसलिए यह लड़ाई सिर्फ़ एक नाम की नहीं, उस आवाज़ के मालिकाने की है।

फ़िलहाल अदालत ने दरवाज़ा बंद नहीं किया, बस फ़ैसला टाला है — सुनवाई जारी रहेगी। तब तक पद पर स्थिति जस की तस है।

बाक़ी का फ़ैसला अब हलफ़नामों की उसी मोटी फ़ाइल में लिखा जाएगा, जिसे अदालत अगली तारीख़ पर खोलेगी।

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

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