उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद: निवेश के दावों के बीच यूपीसीडा के 48 औद्योगिक भूखंड खाली

यूपी इन्वेस्ट सर्वे में खुलासा — गाजियाबाद में यूपीसीडा के 48 औद्योगिक भूखंड खाली पड़े हैं। निवेश के दावों और ज़मीनी हक़ीक़त के बीच का सवाल।

गाजियाबाद: निवेश के दावों के बीच यूपीसीडा के 48 औद्योगिक भूखंड खाली
गाजियाबाद:

निवेश के बड़े-बड़े दावों के बीच एक सवाल सीधे ज़मीन से उठता है — अगर सब कुछ इतना ही बेहतर है, तो औद्योगिक भूखंड खाली क्यों पड़े हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी इन्वेस्ट सर्वे में सामने आया है कि गाजियाबाद में यूपीसीडा के 48 औद्योगिक भूखंड अब भी खाली पड़े हैं। यह आँकड़ा अपने आप में एक कहानी कहता है।

औद्योगिक भूखंड का खाली होना सिर्फ़ ज़मीन का खाली होना नहीं है। हर खाली प्लॉट का मतलब है — वह फ़ैक्ट्री जो नहीं लगी, वह रोज़गार जो नहीं बना, और वह कमाई जो स्थानीय लोगों तक नहीं पहुँची।

सवाल यह है कि निवेश के मंचों पर होने वाले करार और ज़मीन पर दिखने वाली हक़ीक़त के बीच यह फ़ासला क्यों है? कहीं अधोसंरचना की कमी है, कहीं प्रक्रिया की पेचीदगी, तो कहीं ज़मीन की क़ीमत और सुविधाओं का तालमेल नहीं बैठता।

आम आदमी के लिए इसका मतलब साफ़ है। जिस इलाक़े में उद्योग आते हैं, वहाँ नौकरी, दुकानदारी और स्थानीय अर्थव्यवस्था — सब चलती है। खाली पड़े प्लॉट उसी संभावना को रोक देते हैं।

यह कोई आरोप नहीं, जवाबदेही का सवाल है। निवेश का असली पैमाना मंच पर हुई घोषणाएँ नहीं, बल्कि ज़मीन पर लगी फ़ैक्ट्रियाँ और मिले रोज़गार होते हैं। और यही सवाल हर उस इलाक़े को पूछना चाहिए जहाँ विकास के वादे होते हैं।

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