मैदानों में थमा मानसून: उत्तर-पश्चिम भारत में फिर बढ़ी गर्मी और उमस
मानसून की रफ्तार मैदानी इलाकों में सुस्त पड़ गई है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी और उमस बढ़ गई है। जानिए क्या रखें ध्यान।

बारिश आई, थोड़ी राहत दी, और फिर रुक गई।
मानसून की रफ़्तार मैदानी इलाक़ों में सुस्त पड़ गई है। नतीजा — उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी लौट आई है, और साथ में उमस, जो अक्सर गर्मी से ज़्यादा थकाती है।
**उमस ख़तरनाक क्यों।** सूखी गर्मी में पसीना उड़ जाता है और शरीर ठंडा होता है। उमस में पसीना टिका रहता है — शरीर की क़ुदरती ठंडक वाली व्यवस्था धीमी पड़ जाती है। इसीलिए 35 डिग्री की चिपचिपी दोपहर, 40 डिग्री की सूखी दोपहर से ज़्यादा भारी लगती है।
**आपके काम की बात:**
• दोपहर 12 से 3 के बीच बेवजह बाहर न निकलें; निकलें तो सिर ढककर।
• प्यास लगने का इंतज़ार मत कीजिए — थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहिए।
• बुज़ुर्ग, बच्चे और खुले में काम करने वाले मज़दूर सबसे ज़्यादा ख़तरे में होते हैं; उन पर नज़र रखिए।
मानसून लौटेगा — पर तब तक ये कुछ दिन वही हैं जिनमें लोग सबसे ज़्यादा लापरवाह होते हैं। बादल दिखने का मतलब ठंडक नहीं होता।
(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)
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