राम मंदिर चढ़ावा: SIT रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय की निगरानी पर सवाल
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की गड़बड़ी की जांच कर रही SIT की विस्तृत रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की लापरवाही और निगरानी में चूक की ओर इशारा।

भरोसे का हिसाब जब फ़ाइल में उतरता है, तो नाम भी सामने आते हैं।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की लापरवाही और निगरानी में चूक की ओर इशारा किया गया है।
यह वही जाँच है जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट कुछ हफ़्ते पहले सरकार को सौंपी गई थी। उसमें श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित सोने-चांदी के आभूषणों और नकदी के रिकॉर्ड-रखरखाव में विसंगतियों के संकेत मिले थे। अब विस्तृत रिपोर्ट ज़िम्मेदारी की ओर बढ़ी है।
ध्यान रहे — यह जाँच का निष्कर्ष है, अदालत का फ़ैसला नहीं। आगे क्या कार्रवाई होती है, यह सरकार और जाँच एजेंसियों के हाथ में है।
पर सवाल वहीं का वहीं खड़ा है, और वह किसी की आस्था पर नहीं है। सवाल उस व्यवस्था पर है जो करोड़ों लोगों के समर्पण को सँभालती है। जब कोई किसान अपनी बचत में से चाँदी का एक छोटा-सा टुकड़ा चढ़ाता है, तो वह सिर्फ़ धातु नहीं देता — भरोसा देता है।
उस भरोसे का हिसाब रखना धार्मिक काम नहीं, प्रशासनिक ज़िम्मेदारी है। और ज़िम्मेदारी का मतलब ही यही है कि जब चूक हो, तो नाम पूछा जाए।
रिपोर्ट आ गई है। अब देखना यह है कि वह फ़ाइल में दबती है या कार्रवाई में बदलती है।
(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)
टिप्पणियाँ
सबसे पहले अपनी राय दें।