चंदौली में बाढ़ बचाव मॉक ड्रिल: NDRF-SDRF ने दिखाई तैयारी, गोताखोरों ने बचाए 'लोग'
मानसून से पहले चंदौली में बाढ़ बचाव की मॉक ड्रिल हुई। SDM-CO के नेतृत्व में NDRF-SDRF की टीमों ने राहत-बचाव का अभ्यास किया।
नदी किनारे खड़े गाँव वाले देख रहे थे, और पानी में उतरी टीमें एक-एक कर 'डूबते' लोगों को बाहर खींच रही थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चंदौली में बाढ़ से बचाव की मॉक ड्रिल हुई, जिसमें SDM और CO के नेतृत्व में NDRF-SDRF की टीमों ने गोताखोरों के साथ राहत-बचाव का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल को महज़ औपचारिकता समझना भूल है। असली आपदा में सबसे क़ीमती चीज़ होती है — पहले कुछ मिनट। यही अभ्यास तय करता है कि उन मिनटों में टीम कितनी तेज़ और तालमेल में रहती है।
हर साल मानसून में नदियों के किनारे बसे गाँवों के लिए बाढ़ एक पुरानी चुनौती है। नाव, लाइफ़ जैकेट, रस्सी और प्रशिक्षित गोताखोर — यही चार चीज़ें कई बार ज़िंदगी और मौत का फ़र्क़ होती हैं।
ज़मीनी सवाल यह भी है कि अभ्यास के साथ-साथ संसाधन और चेतावनी तंत्र हर ज़रूरतमंद गाँव तक पहुँचे। तैयारी काग़ज़ पर नहीं, किनारे पर दिखनी चाहिए।
जहाँ प्रशासन पहले से चौकस रहता है, वहाँ आपदा का नुक़सान काफ़ी घट जाता है — यही इस ड्रिल का असली संदेश है।
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