सुधार नीति
अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
अलीगढ़ टाइम्स में गलती हो सकती है। जब गलती सामने आती है, तो हम उसे ठीक करते हैं और साफ़ लिखते हैं कि क्या बदला गया। यह पेज बताता है कि गलती कैसे बताएं, हम उसकी जांच कैसे करते हैं और सुधार पाठक को कैसे दिखता है।
गलती कैसे बताएं
किसी खबर में गलती दिखे तो हमें editor@aligarhtimes.com पर ईमेल करें। ईमेल में ये बातें लिखें:
- खबर का लिंक (URL)।
- क्या गलत लिखा है।
- सही जानकारी क्या है।
- सबूत या स्रोत, जैसे सरकारी आदेश, प्रेस विज्ञप्ति या आधिकारिक वेबसाइट का लिंक।
आप हमारे संपर्क पेज से भी संदेश भेज सकते हैं।
हम क्या करते हैं
हर सुधार-सूचना पढ़ी जाती है। संपादक उसे खबर के स्रोत से मिलाते हैं। जांच के बाद ही हम जवाब देते हैं। अगर गलती सही निकलती है, तो हम खबर सुधारते हैं। अगर सूचना सही नहीं निकलती, तो खबर नहीं बदली जाती, और हम बताते हैं कि हमने क्या जांचा।
सुधार के प्रकार
छोटी गलती
वर्तनी, टाइपिंग की गलती या ऐसी फ़ॉर्मेटिंग जिससे खबर का अर्थ नहीं बदलता। इसे सीधे ठीक किया जाता है। इस पर कोई नोट नहीं लगता।
तथ्यात्मक गलती
गलत नाम, संख्या, तारीख, जगह या उद्धरण (quote)। इसे ठीक किया जाता है और खबर के अंत में एक नोट जोड़ा जाता है। नोट कुछ ऐसा दिखेगा:
«सुधार (तारीख): इस खबर में पहले … लिखा था, सही … है।»
गंभीर गलती
ऐसी गलती जो खबर की मुख्य बात बदल दे। इसे ठीक किया जाता है और खबर के ऊपर एक साफ़ नोट लगाया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि क्या बदला गया।
खबर वापस लेना
यह तभी होता है जब खबर का आधार ही गलत निकले। ऐसी खबर चुपचाप हटाई नहीं जाती। उसके पेज पर एक नोट लगाया जाता है, जिसमें समझाया जाता है कि खबर क्यों वापस ली गई।
अपडेट
जो खबर अभी चल रही हो, उसमें नई जानकारी आने पर हम “अपडेट:” लिखकर समय के साथ उसे जोड़ते हैं। जैसे किसी घटना पर बाद में पुलिस का बयान आए, तो वह अपडेट के रूप में जुड़ेगा।
अपडेट नई जानकारी है, गलती का सुधार नहीं। सुधार तब होता है जब पहले छपी बात गलत थी। दोनों को अलग-अलग लिखा जाता है।
चुपचाप बदलाव नहीं
हम गलती छिपाने के लिए कोई खबर चुपचाप नहीं हटाते और न ही चुपचाप उसे दोबारा लिखते हैं।
जब भी किसी खबर की सामग्री बदलती है, तो उस पर दिखने वाली “अपडेट” तारीख भी बदल जाती है।
खबर हटाने के अनुरोध
सही और सटीक खबर हम किसी के अनुरोध पर नहीं हटाते।
कुछ मामलों में हम हटाने पर विचार कर सकते हैं: अदालत का आदेश, पीड़ित या नाबालिग की निजता, या किसी की सुरक्षा पर सीधा खतरा। ऐसे अनुरोध शिकायत निवारण की प्रक्रिया से भेजें।