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तमिलनाडु विधानसभा में 'तमिल थाई वाष्टु' बहाल, सत्र की शुरुआत तमिल गान से

तमिलनाडु विधानसभा ने परंपरा बहाल करते हुए कार्यवाही की शुरुआत तमिल गान 'तमिल थाई वाष्टु' से करने का निर्णय लिया, और समापन राष्ट्रगान से होगा।

तमिलनाडु विधानसभा में 'तमिल थाई वाष्टु' बहाल, सत्र की शुरुआत तमिल गान से
चेन्नई:

समझिए, मामला परंपरा और पहचान का है। तमिलनाडु विधानसभा ने एक पुरानी परिपाटी फिर से बहाल कर दी है।

**क्या हुआ।** विधानसभा ने तय किया है कि सदन की कार्यवाही की शुरुआत तमिल गान 'तमिल थाई वाष्टु' (तमिल माँ की वंदना) से होगी, और कार्यवाही का समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाएगा।

**यह क्यों मायने रखता है।** 'तमिल थाई वाष्टु' को राज्य में राजकीय गीत का दर्जा प्राप्त है और यह तमिल भाषा व सांस्कृतिक अस्मिता से गहराई से जुड़ा है। सदन जैसे सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंच पर इसे आरंभ में रखना, राज्य की भाषाई पहचान को प्रतीकात्मक प्राथमिकता देना है।

**थोड़ा बैकग्राउंड।** तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक स्वाभिमान लंबे समय से केंद्रीय मुद्दे रहे हैं। ऐसे में सदन की कार्यवाही से जुड़े प्रतीक भी सिर्फ़ औपचारिकता नहीं, एक राजनीतिक-सांस्कृतिक संदेश होते हैं।

**अब आगे क्या।** यह व्यवस्था आने वाले सत्रों में नियमित परिपाटी बनेगी। प्रतीक छोटे दिखते हैं, पर सार्वजनिक स्मृति में वे लंबे समय तक टिकते हैं — और राज्य की राजनीति में भाषा का सवाल यूँ ही बार-बार लौटता रहेगा।

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

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