ब्रेकिंग
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बस पलटी, कार से टक्कर: उन्नाव में 5 की मौत, 8 घायलबिजली गिरने से 3 की मौत: यूपी में मानसून सक्रिय, गरज-चमक का अलर्ट — बरतें सावधानीक़तर के रास लफ़ान में धमाका: 12 भारतीयों की मौत, जयशंकर बोले- दूतावास मदद में जुटालखनऊ अग्निकांड: एनिमेशन सेंटर में आग से 15 की मौत, 4 गिरफ्तार, SIT जांचफिरोजाबाद: मोहन भागवत जिस ट्रेन में सवार थे, उस पर पथराव; संघ प्रमुख सुरक्षितअमेरिका-ईरान तनाव में राहत के संकेत: तेहरान पर हमला टला, 'समझौते' का दावाआगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बस पलटी, कार से टक्कर: उन्नाव में 5 की मौत, 8 घायलबिजली गिरने से 3 की मौत: यूपी में मानसून सक्रिय, गरज-चमक का अलर्ट — बरतें सावधानीक़तर के रास लफ़ान में धमाका: 12 भारतीयों की मौत, जयशंकर बोले- दूतावास मदद में जुटालखनऊ अग्निकांड: एनिमेशन सेंटर में आग से 15 की मौत, 4 गिरफ्तार, SIT जांचफिरोजाबाद: मोहन भागवत जिस ट्रेन में सवार थे, उस पर पथराव; संघ प्रमुख सुरक्षितअमेरिका-ईरान तनाव में राहत के संकेत: तेहरान पर हमला टला, 'समझौते' का दावा
देश

दिल्ली में 'जन कल्याण शिविर' शुरू: 42 जगह कैंप, एक छत के नीचे सरकारी सेवाएँ

दिल्ली सरकार ने 42 जगहों पर 'जन कल्याण शिविर' की शुरुआत की। केंद्र की 12 साल और दिल्ली सरकार के एक साल पूरे होने पर सेवाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश।

दिल्ली में 'जन कल्याण शिविर' शुरू: 42 जगह कैंप, एक छत के नीचे सरकारी सेवाएँ
नई दिल्ली:

समझिए, पूरा मामला क्या है। दिल्ली में सरकारी सेवाओं को लोगों तक एक ही जगह पहुँचाने के मक़सद से 'जन कल्याण शिविर' की शुरुआत हुई है।

**क्या हुआ।** मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में 42 अलग-अलग जगहों पर इन शिविरों का उद्घाटन किया। विचार सीधा है — योजनाओं के लाभ, दस्तावेज़ और सेवाओं के लिए लोगों को अलग-अलग दफ़्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि एक ही मंच पर काम हो जाए।

सरकार ने इस पहल को दो मौक़ों से जोड़ा है — केंद्र में मौजूदा सरकार के 12 साल और दिल्ली में राज्य सरकार का एक साल पूरा होना।

**यह क्यों मायने रखता है।** शिविर-आधारित मॉडल का फ़ायदा उन लोगों को सबसे ज़्यादा होता है जिनके लिए दफ़्तरों की दौड़ और कागज़ी प्रक्रिया सबसे बड़ी दीवार है — बुज़ुर्ग, मज़दूर, और वे जो काम के घंटों में छुट्टी नहीं ले सकते। सेवा मोहल्ले तक आए, तो पहुँच आसान होती है।

**पर असली कसौटी।** ऐसे शिविरों की सफलता उद्घाटन से नहीं, उस दिन से तय होती है जब आम आदमी बिना सिफ़ारिश, बिना लंबी लाइन के अपना काम कराकर लौटे। कितने शिविर, कितने दिन और किन सेवाओं के साथ चलते हैं — आँकड़े और ज़मीनी अनुभव ही बताएँगे कि यह सुविधा है या सिर्फ़ आयोजन।

आगे देखना यही होगा कि यह मॉडल बाक़ी राज्यों के लिए मिसाल बनता है या नहीं।

शेयर करें:WhatsAppXFacebook

टिप्पणियाँ

सबसे पहले अपनी राय दें।