जर्मनी में बैन, Musk ने X पर वायरल: आर्मी हैमर की 'Citizen Vigilante' पर बवाल क्यों
आर्मी हैमर की विवादित फिल्म 'Citizen Vigilante' जर्मनी में बैन है, पर एलन मस्क के X पर शेयर करते ही चर्चा में आ गई। विवाद क्या है, और भारत की 'धुरंधर' से तुलना क्यों — समझिए।

एक फिल्म, जिसे जर्मनी ने पर्दे तक पहुँचने ही नहीं दिया — और दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया मालिक ने उसे 24 करोड़ लोगों तक पहुँचा दिया। यही है 'Citizen Vigilante' की पूरी कहानी।
**फिल्म है क्या।** निर्देशक उवे बोल की यह एक्शन-थ्रिलर आर्मी हैमर को एक ऐसे किरदार में दिखाती है जो प्रवासियों से जुड़ी हिंसा से नाराज़ होकर क़ानून अपने हाथ में ले लेता है। यही 'विजिलांटे' (ख़ुद फैसला करने वाला) थीम फिल्म के विवाद की जड़ है।
**बैन कहाँ, क्यों।** जर्मनी ने फिल्म को उम्र-प्रमाणन (एज सर्टिफिकेट) देने से इनकार कर दिया — आरोप, कि यह क़ानून हाथ में लेने को बढ़ावा देती है। बिना रेटिंग के इसे वहाँ न सिनेमाघरों में दिखाया जा सकता है, न विज्ञापन, न बिक्री। यानी असरदार तौर पर बैन। (साफ़ कर दें: भारत में इस पर कोई बैन नहीं है।)
**Musk वाला मोड़।** अमेरिका में यह 19 जून को रिलीज़ हुई। फिर एलन मस्क ने इसे अपने X अकाउंट पर पोस्ट कर दिया, जहाँ उनके करीब 24 करोड़ फॉलोअर हैं। लिंक क़रीब 48 घंटे ज़िंदा रहा और फिर हट गया — पर तब तक फिल्म हर तरफ़ चर्चा में आ चुकी थी।
**भारत का कनेक्शन।** 'न्याय बनाम व्यवस्था' और प्रवासन जैसे मुद्दों पर इसके तेवर के चलते कई लोग इसकी तुलना भारत की 'धुरंधर' से कर रहे हैं। आर्मी हैमर के लिए भी यह मुश्किल दौर के बाद बड़ी वापसी मानी जा रही है।
बैन का इरादा फिल्म को रोकना था। नतीजा उल्टा निकला — जिसे दबाया जाता है, चर्चा उसी के पीछे सबसे तेज़ दौड़ती है।
(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)
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